UN की चिंता बढ़ी, ईरान के ठिकानों तक नहीं पहुंच पा रही निगरानी टीम
विएना: संयुक्त राष्ट्र (UN) की परमाणु निगरानी संस्था 'इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी' (IAEA) ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक बार फिर गंभीर चिंता जताई है। सदस्य देशों को भेजी गई एक गोपनीय रिपोर्ट में एजेंसी ने खुलासा किया है कि पिछले साल जून में युद्ध का शिकार हुए ईरानी परमाणु केंद्रों की जांच करने में उसे अब तक कामयाबी नहीं मिल सकी है।
ईरान के यूरेनियम भंडार पर संशय बरकरार
IAEA ने स्पष्ट किया है कि वह वर्तमान में यह बताने की स्थिति में बिल्कुल नहीं है कि ईरान के पास इस समय कुल कितना संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) मौजूद है, उसकी रासायनिक संरचना क्या है और उसे किस गोपनीय जगह पर छिपाकर रखा गया है। इसके अलावा, एजेंसी इस बात की भी पुष्टि करने में असमर्थ है कि ईरान ने यूरेनियम को और ज्यादा शक्तिशाली बनाने की अपनी सभी गतिविधियों को पूरी तरह से रोका है या नहीं।
सुरक्षा नियमों को लागू करने में रुकावट
खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत सुरक्षा और निगरानी से जुड़ी अपनी तय जिम्मेदारियों को निभाने में एजेंसी खुद को बेबस पा रही है। IAEA ने कड़े शब्दों में कहा है कि ईरान के लिए अपनी अंतरराष्ट्रीय संधि की शर्तों को तुरंत और पूरी तरह से लागू करना बेहद जरूरी और अनिवार्य हो गया है।
केवल बुशेहर परमाणु प्लांट का हुआ दौरा
फरवरी में आई पिछली रिपोर्ट के बाद से अब तक IAEA के जांचकर्ताओं को ईरान में केवल 'बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र' (Bushehr Nuclear Power Plant) का दौरा करने की इजाजत मिली है। यह विशेष निरीक्षण 1 से 3 जून के बीच किया गया था। बुशेहर में चल रहा परमाणु रिएक्टर असल में रूस से मिले 4.5 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम का इस्तेमाल करता है, जिसे सिर्फ बिजली बनाने के लिए जरूरी निम्न स्तर (लो-लेवल) का संवर्धन माना जाता है।
बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच आई रिपोर्ट
यह चिंताजनक रिपोर्ट एक ऐसे नाजुक समय पर आई है जब पश्चिम एशिया में युद्ध का माहौल लगातार गरमा रहा है। हाल ही में बुधवार को हुए ईरानी ड्रोन हमलों में कुवैत के मुख्य हवाई अड्डे के यात्री टर्मिनल को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसमें एक व्यक्ति की जान चली गई और कई लोग घायल हुए। इस हमले के बाद हवाई अड्डे को कुछ समय के लिए बंद भी करना पड़ा था। इस घटना को ईरान और अमेरिका के बीच चल रही आपसी सैन्य कार्रवाई का हिस्सा माना जा रहा है, जिसने दोनों देशों के बीच हुए अस्थायी युद्धविराम पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
10 परमाणु बम बनाने लायक सामग्री होने का अनुमान
IAEA के आंकड़ों के मुताबिक, ईरान के पास इस समय 60 प्रतिशत तक संवर्धित किया हुआ लगभग 440.9 किलोग्राम यूरेनियम का बड़ा स्टॉक मौजूद है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु हथियार बनाने के लिए जरूरी 90 प्रतिशत के स्तर से यह तकनीकी रूप से अब ज्यादा दूर नहीं है। IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि यदि ईरान अपने इस परमाणु भंडार को हथियार में बदलने का फैसला करता है, तो यह सामग्री सैद्धांतिक रूप से लगभग 10 परमाणु बम तैयार करने के लिए काफी होगी। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि इसका यह मतलब कतई नहीं है कि ईरान ने परमाणु बम बना लिए हैं।
हर महीने जांच होना है बेहद जरूरी
अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार, इतने ऊंचे स्तर के खतरनाक परमाणु मटीरियल की हर महीने भौतिक रूप से जांच की जानी अनिवार्य होती है, लेकिन मौजूदा हालातों और पाबंदियों के कारण IAEA ऐसा नहीं कर पा रही है। रिपोर्ट में महानिदेशक ग्रॉसी ने इस विवाद को सुलझाने के लिए चल रही कूटनीतिक वार्ताओं का समर्थन किया है और कहा है कि वे किसी भी नए शांति समझौते को लागू कराने में पूरा सहयोग देने के लिए तैयार हैं। इस बीच, युद्धविराम को स्थायी रूप देने की कोशिशें लगातार जटिल होती जा रही हैं, खासकर लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्लाह और इस्राइल के बीच बढ़ते सीधे टकराव ने पूरे क्षेत्र में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है।

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