एअर इंडिया का बड़ा फैसला, पी. एस. खरोला टीम में जुड़े
नई दिल्ली: एअर इंडिया ने अपने उच्च स्तरीय प्रबंधन में एक बहुत बड़ा फेरबदल किया है। देश के पूर्व नागरिक उड्डयन सचिव प्रदीप सिंह खरोला की कंपनी में 'कार्यकारी सलाहकार' के पद पर वापसी हुई है। वे सीधे एअर इंडिया के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन को रिपोर्ट करेंगे और मैनेजमेंट कमेटी के पूर्णकालिक सदस्य के रूप में काम संभालेंगे।
कंपनी के एक आंतरिक पत्र से यह जानकारी सामने आई है कि खरोला तत्काल प्रभाव से एक्टिव हो गए हैं। यह बदलाव ऐसे समय पर हो रहा है जब एअर इंडिया के मौजूदा सीईओ और एमडी कैंपबेल विल्सन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और वे आने वाले कुछ महीनों में कंपनी छोड़ देंगे। बता दें कि जनवरी 2022 में टाटा समूह द्वारा कमान संभालने के बाद से एयरलाइन लगातार भारी घाटे और अन्य समस्याओं से जूझ रही है।
प्रदीप सिंह खरोला की वापसी क्यों है बेहद अहम?
प्रदीप सिंह खरोला के पास एअर इंडिया को संभालने का पुराना और बेहतरीन अनुभव है। उन्होंने साल 2017 से 2019 तक एयरलाइन के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक (CMD) के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं। इसके बाद, नागरिक उड्डयन सचिव के तौर पर उन्होंने एअर इंडिया के निजीकरण की पूरी प्रक्रिया में एक मुख्य भूमिका निभाई थी। जाने वाले सीईओ कैंपबेल विल्सन ने भी माना है कि खरोला का यह अनुभव नए सीईओ के आने तक कंपनी में लीडरशिप के बदलाव को आसान और मजबूत बनाएगा।
एअर इंडिया के सामने खड़ीं बड़ी चुनौतियाँ
टाटा ग्रुप के हाथों में आने के बाद भी एअर इंडिया की राह आसान नहीं रही है। एयरलाइन इस वक्त भारी वित्तीय नुकसान से गुजर रही है। ऐसे नाजुक समय पर सीईओ कैंपबेल विल्सन का इस्तीफा कंपनी के लिए एक बड़ा झटका है। एयरलाइन को अब एक ऐसे नए नेतृत्व की तलाश है जो इसे इस संकट से बाहर निकाल सके, और यही वजह है कि खरोला के अनुभवों पर टाटा समूह ने इतना बड़ा भरोसा जताया है।
घाटे से उबरने के लिए उठाए जा रहे हैं कड़े कदम
वित्तीय संकट और भारी नुकसान को देखते हुए एअर इंडिया ने पिछले कुछ हफ्तों में कई कड़े फैसले लिए हैं। खर्चों में कटौती करने के लिए कंपनी ने 'बिना भोजन वाले किराए' (Unbundled Fares) की शुरुआत की है, जिससे यात्रियों को बिना खाने के टिकट सस्ते में मिल सकें। इसके अलावा, अस्थाई रूप से कुछ फ्लाइट रूट्स में भी कटौती की गई है। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन खुद शुरुआत से ही एयरलाइन के बोर्ड की कमान संभाले हुए हैं ताकि कंपनी को जल्द से जल्द पटरी पर लाया जा सके।

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