भारत-अफ्रीका रिश्तों में मजबूती, मंत्री-स्तरीय बैठकों का दौर शुरू
नई दिल्ली। करीब दस वर्षों के लंबे अंतराल के बाद इस महीने चौथा भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है, जो दोनों क्षेत्रों के बीच कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस भव्य आयोजन के दौरान उच्च स्तरीय मंत्री-स्तरीय बैठकें, व्यापारिक संवाद और थिंक टैंकों का मंथन होगा, जिसका समापन 31 मई को मुख्य शिखर सम्मेलन के साथ होगा। इस सम्मेलन में अफ्रीका के कई प्रभावशाली नेताओं के शामिल होने की संभावना है। साथ ही, इसके तुरंत बाद 'बिग कैट अलायंस' शिखर सम्मेलन भी आयोजित होगा, जिसमें वन्यजीव संरक्षण की दिशा में 10 अफ्रीकी देशों की भागीदारी की उम्मीद है, जो वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करेगा।
रणनीतिक थीम और समावेशी परिवर्तन पर विशेष जोर
इस वर्ष के सम्मेलन को “आईए स्प्रीट: नवाचार, सुदृढ़ता और समावेशी परिवर्तन के लिए भारत-अफ्रीका रणनीतिक साझेदारी” की विशेष थीम दी गई है, जो दोनों क्षेत्रों के भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण को दर्शाती है। यह साझेदारी केवल कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नवाचार और समावेशी विकास के जरिए अफ्रीकी देशों की बुनियादी समस्याओं के समाधान की दिशा में एक साझा प्रयास है। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने हाल ही में अफ्रीकी संघ आयोग के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर तैयारियों को अंतिम रूप दिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारत इस बार द्विपक्षीय संबंधों को एक नए और सुदृढ़ धरातल पर ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
विकास साझेदारी और अरबों डॉलर का निवेश
अफ्रीकी महाद्वीप के प्रति भारत का झुकाव आर्थिक आंकड़ों में भी स्पष्ट रूप से नजर आता है, जहां अफ्रीका अब भारत की विदेशी विकास सहायता का दूसरा सबसे बड़ा लाभार्थी बन चुका है। नई दिल्ली ने अब तक 41 अफ्रीकी देशों को 190 से अधिक 'लाइन ऑफ क्रेडिट' जारी की हैं, जिनकी कुल लागत 10 अरब डॉलर से अधिक है। इसके अलावा, करीब 4.5 अरब डॉलर की लागत वाली 20 प्रमुख परियोजनाएं सफलतापूर्वक पूरी की जा चुकी हैं। ये परियोजनाएं मुख्य रूप से बिजली आपूर्ति, शुद्ध जल, कृषि विकास, ग्रामीण विद्युतीकरण और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे जीवन रक्षक और बुनियादी ढांचागत क्षेत्रों में केंद्रित हैं।
कृषि मशीनीकरण और डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार
भारत और अफ्रीका के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कृषि और तकनीक का हस्तांतरण भी है। भारतीय कंपनियों ने अफ्रीकी कृषि क्षेत्र में अपनी सक्रियता बढ़ाते हुए आधुनिक मशीनीकरण, वैल्यू-एडिशन और प्रोसेसिंग इकाइयों की स्थापना में अहम भूमिका निभाई है। इस निवेश से न केवल अफ्रीका की खाद्य सुरक्षा मजबूत हुई है, बल्कि वहां के स्थानीय संसाधनों के प्रसंस्करण को भी बढ़ावा मिला है। बुनियादी ढांचे के साथ-साथ डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में हो रहे कार्य यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि भारत और अफ्रीका के दूरस्थ क्षेत्रों के बीच की दूरियां कम हों और एक सशक्त आर्थिक गलियारे का निर्माण हो सके।

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