$4,000 के नीचे आया गोल्ड, चांदी में भी भारी बिकवाली
मुंबई: वैश्विक बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेतों और मजबूत होते अमेरिकी डॉलर के कारण शुक्रवार (26 जून) को सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों पर जबरदस्त दबाव देखा गया। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और बढ़ोतरी करने की आशंकाओं तथा पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना (स्पॉट गोल्ड) 0.9% की गिरावट के साथ $3,991.49 प्रति औंस पर आ गया, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी 1% टूटकर $4,007.30 पर बंद हुआ। इस गिरावट के साथ ही सोना नवंबर 2025 के बाद पहली बार $4,000 के बेहद महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे चला गया है।
अमेरिकी महंगाई और ब्याज दरों के डर ने बिगाड़ा सेंटिमेंट
कीमती धातुओं में आई इस ताजा गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका से आए महंगाई के आंकड़े हैं। गुरुवार को जारी डेटा के मुताबिक, पश्चिम एशिया में तनाव के चलते ईंधन (ऊर्जा) की कीमतें बढ़ने से अमेरिका में मई महीने की महंगाई दर तीन साल में पहली बार 4% के पार निकल गई है। न्यूयॉर्क फेड के प्रेसिडेंट जॉन विलियम्स सहित कई शीर्ष अधिकारियों का मानना है कि महंगाई अभी भी बैंक के 2% के तय लक्ष्य से काफी ऊपर है। ऐसे में 'CME फेडवॉच' के अनुसार, ट्रेडर्स अब इस साल तीन बार ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद कर रहे हैं। ब्याज दरों में बढ़ोतरी से सोने और चांदी जैसे नॉन-यील्डिंग एसेट्स (बिना ब्याज वाले निवेश) के प्रति निवेशकों का आकर्षण कम हो जाता है।
डॉलर की मजबूती और कमजोर ग्लोबल डिमांड से बढ़ा दबाव
बुलियन मार्केट पर दोतरफा मार पड़ रही है। एक तरफ जहां यूएस डॉलर इंडेक्स लगातार दूसरे हफ्ते मजबूत हुआ है, जिससे अन्य मुद्रा (करेंसी) रखने वाले देशों के लिए सोना खरीदना महंगा हो गया है। वहीं दूसरी तरफ, दुनिया के सबसे बड़े स्वर्ण उपभोक्ता चीन की तरफ से हांगकांग के रास्ते होने वाले शुद्ध सोना आयात में मई महीने के दौरान करीब 38% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। यह वैश्विक स्तर पर सोने की घटती फिजिकल डिमांड (भौतिक मांग) की ओर साफ इशारा करता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव
अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर भी अनिश्चितता का माहौल गहरा गया है। समुद्र में एक व्यापारिक जहाज पर हुए हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र (UN) की अंतरराष्ट्रीय समुद्री संस्था ने होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों को एस्कॉर्ट करने का अपना अभियान फिलहाल रोक दिया है। इस घटना के बाद अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे बेहद संवेदनशील शांति समझौते के भविष्य को लेकर बाजार में नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। निवेशक अब आने वाले अमेरिकी पीसीई (PCE) इन्फ्लेशन डेटा का इंतजार कर रहे हैं, जो बाजार को आगे की दिशा देगा।
क्या और गिरेंगे दाम? जानिए बाजार के दिग्गजों का क्या है कहना
बाजार के जानकारों का मानना है कि शॉर्ट-टर्म में बाजार में उतार-चढ़ाव (वोलाटिलिटी) जारी रहेगी, लेकिन लंबे समय के लिए इसके बुनियादी सिद्धांत (फंडामेंटल्स) अभी भी मजबूत हैं।
पृथ्वीराज कोठारी (मैनेजिंग डायरेक्टर, ऋद्धिसिद्धि बुलियंस): "फेडरल रिजर्व के कड़े रुख और येन कैरी ट्रेड के खत्म होने से बाजार पर चौतरफा दबाव है। तकनीकी रूप से सोना $4,000 के अहम सपोर्ट को तोड़ चुका है, जिससे यह शॉर्ट-टर्म में $3,600 प्रति औंस तक नीचे जा सकता है। वहीं चांदी भी $60 के स्तर से नीचे आ चुकी है और $50 के निचले स्तर को छू सकती है। हालांकि, बाजार ओवरसोल्ड जोन में है, इसलिए जल्द ही एक शॉर्ट-कवरिंग रैली भी देखने को मिल सकती है।"
कॉलिन शाह (मैनेजिंग डायरेक्टर, कामा ज्वेलरी): "यह गिरावट किसी बड़ी मंदी का संकेत नहीं है, बल्कि बदलते वैश्विक आर्थिक हालातों के कारण आया एक 'हेल्दी करेक्शन' है। डॉलर की मजबूती से निवेशकों का रुझान थोड़ा बदला है, लेकिन भारत जैसे देशों में कीमतों में आई इस कमी का फायदा उठाकर लोग वैल्यू बाइंग (सस्ती कीमतों पर खरीदारी) शुरू करेंगे। लंबी अवधि में सोने और चांदी का आउटलुक तेजी का ही बना हुआ है।"

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