TMC में असंतोष के बाद BJP को दिख सकता अवसर
नई दिल्ली: देश की राजनीति में तेजी से बदलते समीकरणों के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उम्मीदों को नए पंख मिल गए हैं। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मची बड़ी आंतरिक टूट, तमिलनाडु में सत्ता गंवाने के बाद डीएमके (DMK) की कांग्रेस से बढ़ती दूरियां और राज्यसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग/NDA) के दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंचने की संभावनाओं ने भाजपा के हौसलों को और मजबूत कर दिया है। दरअसल, भाजपा को अब तृणमूल के विधायक दल में हुई बड़ी बगावत के बाद उसके संसदीय दल (सांसदों) में भी इसी तरह की बड़ी टूट का इंतजार है, ताकि वह देश में परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे बड़े फैसलों पर नए सिरे से कदम आगे बढ़ा सके।
मानसून सत्र में संविधान संशोधन विधेयक लाने की तैयारी
भाजपा इस राजनीतिक अनुकूलता का फायदा उठाते हुए आगामी मानसून सत्र में संविधान संशोधन विधेयक को फिर से संसद में पेश करने की योजना बना रही है। इसके लिए पार्टी की रणनीति आगामी 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद डीएमके सहित कुछ अन्य विपक्षी दलों को अपने पक्ष में साधने की है। भाजपा के रणनीतिकारों को भरोसा है कि बदला हुआ राजनीतिक माहौल इस अहम विधेयक को पास कराने की राह आसान कर देगा।
भाजपा के बढ़ते हौसलों के तीन मुख्य कारण
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे तीन बड़े राजनीतिक कारण माने जा रहे हैं। पहला कारण यह है कि 10 राज्यों की राज्यसभा सीटों के चुनावी नतीजे आने के बाद उच्च सदन (राज्यसभा) में भाजपा अपने सहयोगी दलों के साथ दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े के बेहद करीब पहुंच जाएगी। दूसरा कारण पश्चिम बंगाल में टीएमसी के विधायकों में हुई बड़ी बगावत है, जिसने अब पार्टी के सांसदों में भी बड़ी टूट का रास्ता साफ कर दिया है। तीसरा और अंतिम कारण तमिलनाडु में डीएमके का कांग्रेस से अलग होना है, जिसके बाद से भाजपा और डीएमके के बीच नजदीकियां बढ़ती हुई दिखाई दे रही हैं। भाजपा का मानना है कि टीएमसी में बिखराव और डीएमके का साथ मिलना संविधान संशोधन विधेयक के लिए एक नया और आसान रास्ता खोल सकता है।

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