बृजमोहन अग्रवाल ने दिखाई सख्ती, रेंजर की गैरमौजूदगी पर तत्काल कार्रवाई
रायपुर: राजधानी रायपुर के गोबरा नवापारा इलाके में आम जनता की समस्याओं के समाधान के लिए सुशासन ‘तिहार शिविर’ का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम के दौरान एक गंभीर शिकायत सामने आने पर क्षेत्रीय सांसद बृजमोहन अग्रवाल का गुस्सा भड़क गया। उन्होंने मंच से ही जिम्मेदार रेंजर की अनुपस्थिति पर सख्त नाराजगी जाहिर की और जिला प्रशासन को निर्देश देते हुए कहा, "रेंजर इस महत्वपूर्ण शिविर से गायब क्यों हैं? उन्हें तुरंत कारण बताओ (शोकॉज) नोटिस थमाओ और तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) करो।" सांसद के इस कड़े तेवर का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से सुर्खियां बटोर रहा है।
रेंजर की लापरवाही पर बरसे सांसद
यह पूरा विवाद कुलेश्वर महादेव शासकीय महाविद्यालय की बाउंड्री वॉल (चारदीवारी) के निर्माण कार्य से जुड़ा था, जिसमें वन विभाग की ओर से आपत्ति जताई गई थी। जब शिविर में इस समस्या को लेकर चर्चा शुरू हुई, तो संबंधित रेंजर वन विभाग का पक्ष रखने या जनता की बात सुनने के लिए वहां मौजूद नहीं थे। सांसद अग्रवाल ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि जब सरकार ने आम जनता की शिकायतों का मौके पर निपटारा करने के लिए सभी महकमों के अफसरों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने को कहा है, तो ऐसे में किसी जिम्मेदार अधिकारी का न आना घोर लापरवाही है। इसके तुरंत बाद उन्होंने रेंजर के निलंबन की फाइल आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
एक हफ्ते के भीतर समस्याओं का हल करने का अल्टीमेटम
इस जनसुनवाई शिविर में विभिन्न सरकारी विभागों से जुड़े ढेरों आवेदन और शिकायतें आईं। मामले की गंभीरता को देखते हुए मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई कि शिविर में आए सभी प्रार्थना पत्रों का निराकरण आगामी 7 दिनों के भीतर हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि दी गई समय-सीमा में जनता के काम पूरे नहीं हुए, तो संबंधित अधिकारियों को विभागीय कार्रवाई के लिए तैयार रहना होगा।
स्कूलों की जमीन पर कब्जे का मामला गरमाया
शिविर में स्थानीय हरिहर हाई स्कूल की जमीन पर अवैध कब्जे और नवापारा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की आरक्षित भूमि से जुड़े विवाद का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। इसके बाद सांसद ने पटवारी, आरआई (राजस्व निरीक्षक) और तहसीलदार को सीधे मंच पर तलब किया। राजस्व विभाग के इन अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे जमीनों से जुड़े इन तमाम लंबित मामलों की मौके पर जाकर जांच करें और जल्द से जल्द इसका स्थाई समाधान निकालें।

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