AAP नेताओं का एक्शन: Manish Sisodia ने भी कोर्ट पेशी से बनाई दूरी
नई दिल्ली: दिल्ली आबकारी नीति मामले में कानूनी और राजनीतिक गतिरोध और गहरा गया है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नक्शेकदम पर चलते हुए अब दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत की कार्यवाही में शामिल होने से इनकार कर दिया है।
सिसोदिया ने एक औपचारिक पत्र और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) के माध्यम से घोषणा की कि वह और उनके वकील अब इस अदालत के समक्ष पेश नहीं होंगे।
"सत्याग्रह के अलावा कोई विकल्प नहीं": पत्र की मुख्य बातें
मनीष सिसोदिया ने अपने फैसले के पीछे नैतिक और संवैधानिक कारणों का हवाला दिया है:
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अंतरात्मा की आवाज: सिसोदिया ने लिखा कि "पूर्ण सम्मान के साथ" उनकी अंतरात्मा उन्हें वर्तमान स्थितियों में इस अदालत के समक्ष सुनवाई का हिस्सा बनने की अनुमति नहीं देती है।
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न्याय की पारदर्शिता: उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि न्याय व्यवस्था का आधार ही 'भरोसा' है। उनके अनुसार, नागरिकों को केवल न्याय मिलना ही नहीं चाहिए, बल्कि वह होता हुआ महसूस भी होना चाहिए।
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अटल आस्था और संदेह: पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान और न्यायपालिका में उनका अटूट विश्वास है, लेकिन जब मन में निष्पक्षता को लेकर गंभीर संदेह उत्पन्न हों, तो केवल औपचारिकता के लिए अदालत में बैठना उचित नहीं है।
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विरोध का तरीका: उन्होंने अपने इस कदम को 'सत्याग्रह' का नाम दिया है।
आगे का मार्ग: सुप्रीम कोर्ट की तैयारी
आम आदमी पार्टी के दोनों वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वे अब इस मामले में उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाएंगे। जानकारों का मानना है कि यह बहिष्कार न केवल एक कानूनी रणनीति है, बल्कि इसके जरिए जनता के बीच 'निष्पक्ष सुनवाई न होने' का एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की भी कोशिश की जा रही है।

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