मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र, तीखे बयान बने सत्र समाप्ति की वजह
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 7 मार्च तक चलना था, लेकिन होली और लगातार हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही अनिश्चितकालीन के लिए स्थगित कर दी गई. 2026-27 का बजट पेश होने से लेकर ‘औकात’ वाले विवाद और शीर्षासन तक, यह सत्र कई वजहों से चर्चा में रहा. सत्र की शुरुआत 2026-27 के बजट पेश होने के साथ हुई. सरकार ने इसे विकास और जनकल्याण केंद्रित बजट बताया. योजनाओं की रफ्तार, अधोसंरचना और सामाजिक क्षेत्रों पर फोकस का दावा किया गया. लेकिन बजट के बाद सियासत ने तेजी पकड़ी. इंदौर के भागीरथपुरा मामले पर सदन में स्थगन प्रस्ताव आया. चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
‘औकात में रहिए’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया
कार्यवाही के दौरान आरोप-प्रत्यारोप के बीच ‘औकात में रहिए’ जैसे शब्दों ने सदन का तापमान बढ़ा दिया. जवाब में भी कड़ी प्रतिक्रिया आई और हंगामा तेज हो गया. हालांकि बाद में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन की गरिमा का जिक्र करते हुए खेद व्यक्त किया. सदस्यों ने भी मर्यादा बनाए रखने का संकल्प लिया।
सवालों की बौछार और विभागीय घेराबंदी
सत्र के दौरान नगरीय प्रशासन, स्कूल शिक्षा और जल जीवन मिशन जैसे विभागों से जुड़े सवालों की बौछार रही. अतिक्रमण, शहरी योजनाएं और विकास कार्यों पर विपक्ष ने सरकार को घेरा. सौरभ शर्मा प्रकरण का जिक्र हुआ तो कथित संपत्ति को लेकर विपक्ष ने जांच एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाए. भोपाल के स्लॉटर हाउस, नगर निगम की नसबंदी व्यवस्था और अन्य स्थानीय मुद्दों पर भी जमकर बहस हुई।
सत्ता पक्ष में भी तनातनी
सत्र के दौरान सिर्फ सत्ता और विपक्ष में ही नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के भीतर भी मतभेद दिखे. विधायक दल की बैठकों में समन्वय की नसीहत दी गई, लेकिन कुछ मौकों पर मंत्री और विधायकों के बीच तीखी बहस की खबरें भी सामने आईं।
शीर्षासन बना आखिरी दृश्य
सत्र के अंतिम दिनों में कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने गांधी प्रतिमा के पास शीर्षासन कर विरोध दर्ज कराया. उनके खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर वे नाराज थे. विधानसभा अध्यक्ष के आश्वासन के बाद उन्होंने प्रदर्शन समाप्त किया. यह दृश्य पूरे सत्र का सबसे अलग और चर्चित क्षण बन गया।
अनिश्चितकालीन स्थगन
होली और भगोरिया पर्व के मद्देनजर कार्यवाही अनिश्चितकालीन के लिए स्थगित कर दी गई. इस तरह बजट, बहस, बयान और बवाल के बीच यह सत्र समाप्त हुआ. मध्य प्रदेश विधानसभा का यह बजट सत्र विकास के दावों से ज्यादा सियासी तल्खी, आंतरिक असहमतियों और प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शनों के लिए याद रखा जाएगा।

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