समर्थकों की नजरें अदालत के निर्णय पर टिकीं
प्रयागराज। नाबालिगों के साथ यौन शोषण करने के मामले में दर्ज एफआईआर के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट पहुंचे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य की अग्रिम जमानत अर्जी पर शुक्रवार को सुनवाई होनी है। यह मामला न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की अदालत में क्रम संख्या 142 पर सूचीबद्ध है। दोपहर बाद फैसला आने की उम्मीद है। शनिवार से हाईकोर्ट में होली की छुट्टी भी शुरू होगी। ऐसे में यह सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण है। कोर्ट के सामने शंकराचार्य के अधिवक्ता यह तर्क दे सकते हैं कि आज के बाद कोर्ट अब नौ मार्च को खुलेगी। इस दौरान पुलिस शंकराचार्य को गिरफ्तार भी कर सकती है। इसलिए आज का दिन शंकराचार्य के लिए बेहद अहम है। कोई न कोई फैसला आने की संभावना काफी अधिक है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक प्रमुख हिंदू संत और उत्तराखंड के जोशीमठ स्थित ज्योतिष पीठ के वर्तमान शंकराचार्य हैं। वह अपने धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक विचारों के कारण समकालीन भारतीय सार्वजनिक जीवन में चर्चित व्यक्तित्व हैं।
धार्मिक और सामाजिक सक्रियता
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गंगा की अविरलता और गौ-रक्षा के लिए आंदोलन चलाए। 2008 में उन्होंने गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित करने की मांग में 112 दिन का अनशन किया। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में मंदिरों के ध्वंस के विरोध, केदारनाथ मंदिर के सोने की सुरक्षा, और सनातन परंपराओं की रक्षा जैसे मुद्दों पर वे मुखर रहे हैं

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